संदेश

हत्या की पीड़िता के परिजनों से मिले प्रोफेसर S P सिंह बघेल

चित्र
  कल माननीय केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एस.पी. सिंह बघेल जी विधानसभा टूंडला (जनपद फिरोज़ाबाद) के ग्राम पांडेगड़ी पहुंचे और हत्या की पीड़िता के परिजनों से मिलकर पूरे घटनाक्रम की जानकारी प्राप्त की। माननीय मंत्री जी ने मौके पर एसपी सिटी (फिरोज़ाबाद), सीओ एवं एसओ को बुलाकर प्रकरण की विस्तृत जानकारी ली। इस दौरान एसपी सिटी ने आश्वस्त किया कि अभियुक्त की पहचान लगभग कर ली गई है तथा ठोस साक्ष्यों के संकलन की प्रक्रिया जारी है, ताकि दोषियों को अदालत से कठोरतम सज़ा दिलाई जा सके।

काजल बघेल के परिजनों संग दुःख बांटने पहुंचा राष्ट्र उदय पार्टी का प्रतिनिधि मंडल

चित्र
  राष्ट्र उदय पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष माननीय बाबूराम पाल जी निर्देशानुसार राष्ट्र उदय पार्टी के उत्तर प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष माननीय रामआसरे पाल जी के नेतृत्य में राष्ट्र उदय पार्टी का प्रतिनिधिमंडल प्रदेश महासचिव डॉ एस के पाल, पूर्व लोकसभा प्रत्याशी एडवोकेट प्रेम दत्त बघेल जी राष्ट्र उदय पार्टी के वरिष्ठ नेता डॉ वीरेंद्र सिंह बघेल जी ,श्याम बाबू बघेल जी ,मनीष बघेल जी ,आगरा जिला अध्यक्ष नीलू बघेल जी ,उदयवीर बघेल जी तेजपाल जी बघेल जी भोले बघेल जी ,विधानसभा अध्यक्ष येतमातपुर संजय बघेल जी ,और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ फिरोजाबाद के ग्राम सभा पांडेय गढ़ी थाना रजावली पहुंचा और पीड़ित परिवार से मुलाकात कर दुख प्रकट किया और साथ ही हत्यारों की गिरफ्तारी के लिए अपनी बात रखी और न्याय की लड़ाई को मजबूती से लड़ने का आश्वासन दिया।

मेजर ध्यानचंद: हॉकी के जादूगर

चित्र
मेजर ध्यानचंद, जिन्हें विश्व हॉकी का " जादूगर " कहा जाता है, भारतीय खेल इतिहास की सबसे प्रतिष्ठित शख्सियतों में से एक हैं। उनका जन्म 29 अगस्त 1905 को इलाहाबाद (अब प्रयागराज), उत्तर प्रदेश में हुआ था। ध्यानचंद ने हॉकी को न केवल भारत में, बल्कि वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान दी। उनके असाधारण कौशल, गति, और गोल करने की कला ने उन्हें अमर बना दिया। प्रारंभिक जीवन और करियर की शुरुआत ध्यानचंद का जन्म एक साधारण परिवार में हुआ था। उनके पिता भारतीय सेना में थे, जिसके कारण परिवार को बार-बार स्थान बदलना पड़ता था। ध्यानचंद ने कम उम्र में ही हॉकी स्टिक थाम ली थी।  1922 में, केवल 17 वर्ष की आयु में, उन्होंने भारतीय सेना में भर्ती होने के बाद हॉकी खेलना शुरू किया। उनकी प्रतिभा जल्द ही सबके सामने आई, और वे सेना की हॉकी टीम का हिस्सा बन गए।  ओलंपिक में स्वर्णिम युग ध्यानचंद ने भारत को अंतरराष्ट्रीय हॉकी में शीर्ष स्थान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।  उन्होंने 1928, 1932 और 1936 के ओलंपिक खेलों में भारत को स्वर्ण पदक दिलाए।  1928 (एम्स्टर्डम ओलंपिक) : भारत ने अपनी पहली ओलंपिक ह...

बकरी चराने गई 9 वर्षीय बालिका की गला घोंटकर हत्या, गांव वालों ने किया प्रदर्शन

चित्र
The Shepherd Times YouTube Channel रजावली क्षेत्र के गांव गढ़ी पांडेय निवासी देवेंद्र सिंह बघेल अपनी नौ वर्षीय पुत्री काजल को लेकर बकरी चराने सुबह 6.45 बजे गांव के बाहर गए थे। एक चारदीवारी के अंदर खाली प्लाट पर पिता-पुत्री बकरी चरा रहे थे। देवेंद्र आठ बजे चाय पीने घर आए थे। कुछ देर बाद लौट कर गए तो बालिका मौके पर नहीं मिली। बकरियां चर रही थीं। बालिका के गायब होने से सनसनी फैल गई। तलाश करने पर काजल का शव बाजरा के खेत में मिला। रस्सी से उसका गला घोंट कर हत्या की गई थी। इससे आक्रोशित ग्रामीणाें ने रजावली चौराहे पर जाम लगा दिया। एसपी सिटी रविशंकर प्रसाद, टूंडला एसडीएम मौके पर पहुंचे। Photo : AmarUjala

बसवार घूरपुर में स्व० देव नारायण पाल जी के निवास पर पहुंचा Shepherd Tiger Force India का प्रतिनिधि मंडल

चित्र
यमुनापार प्रयागराज।  23-August-2025 बसवार घूरपुर  ट्रेन की चपेट में आने से भेड़ बकरियो की जान गई थी साथ ही देव नारायण पाल की भी मृत्यु हो गई थी। 23 अगस्त 2025 को बसवार घूरपुर में स्व० देव नारायण पाल जी के निवास पर शेफर्ड धामू पाल जी (राष्ट्रीय अध्यक्ष - Shepherd Tiger Force India) के नेतृत्व में संगठन का एक प्रतिनिधि मंडल पहुचा और शोक संवेदना प्रकट किया साथ ही संगठन ने ₹12000 का आर्थिक सहयोग किया।

क्रान्तिवीर संगोली रायन्ना की जयंती पर विशेष लेख

चित्र
  क्रान्तिवीर संगोली रायन्ना की जयंती पर विशेष आज, 15 अगस्त 2025, कर्नाटक के महान स्वतंत्रता सेनानी संगोली रायन्ना की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही है। 15 अगस्त 1798 को बेलगावी जिले के संगोली गांव में एक धनगर/कुरुबा परिवार में जन्मे रायन्ना, कित्तूर साम्राज्य के सेनापति और रानी चेन्नम्मा के विश्वस्त सहयोगी थे। उन्होंने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ प्रथम सशस्त्र क्रांति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। रायन्ना ने किसानों की जमीन और जनता की आजादी के लिए गुरिल्ला युद्ध छेड़ा, जिसने अंग्रेजों को कड़ी चुनौती दी। उनकी वीरता और बलिदान की गाथा आज भी प्रेरणा देती है। 26 जनवरी 1831 को अंग्रेजों ने उन्हें फांसी दे दी, लेकिन उनका साहस अमर रहा। कर्नाटक सरकार ने उनकी स्मृति में 110 एकड़ भूमि पर एक भव्य स्मारक बनाने की घोषणा की है, जहां उन्हें फांसी दी गई थी। इसके अलावा, बेलगावी में उनकी जीवन गाथा को दर्शाने वाली शौर्य भूमि (रॉक गार्डन) पर्यटकों को आकर्षित कर रही है। संगोली रायन्ना की जयंती पर, सोशल मीडिया पर भी लोग उन्हें याद कर रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, "जिनके खून में बगावत, द...

श्री शिव कुमार पाल बने डिप्टी सॉलिसिटर जनरल ऑफ इंडिया — शेफर्ड टाइगर फोर्स इंडिया ने दी शुभकामनाएं

चित्र