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एकजुटता ही न्याय का आधार: व्यक्तिगत विरोध से ऊपर उठकर समाज के लिए जागें

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जय माँ अहिल्या! आज हमारा समाज एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहाँ हमारे शब्द और हमारे कार्य आने वाले कल की दिशा तय करेंगे। पाल समाज हमेशा से ही अपनी कर्मठता और न्यायप्रियता के लिए जाना गया है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में हमें अपनी रणनीति और सोच पर गहराई से विचार करने की आवश्यकता है। विरोध का स्वरूप: विनाशकारी नहीं, सुधारात्मक हो समाज के भीतर वैचारिक मतभेद होना कोई बुरी बात नहीं है। लोकतंत्र और स्वस्थ समाज में विरोध प्रगति का संकेत है। लेकिन प्रश्न यह है कि हमारे विरोध का तरीका क्या है? यदि हमारा विरोध किसी व्यक्ति को समाज सेवा से हतोत्साहित करने या उसे विवश करने के लिए है, तो हम अपनी ही शक्ति को कम कर रहे हैं। हमारा तरीका ऐसा होना चाहिए कि सामने वाला आपकी बात की तार्किकता को **स्वीकार** करे और स्वयं में सुधार करने के लिए प्रेरित हो। विरोध का लक्ष्य 'व्यक्ति का पतन' नहीं बल्कि 'व्यवस्था का सुधार' होना चाहिए। हर व्यक्ति में एक 'अगुवा' छिपा है अक्सर हम यह सोचकर पीछे हट जाते हैं कि कोई और न्याय की आवाज उठाएगा। हम किसी एक चेहरे या एक नेतृत्व की राह ताकते रहते हैं। पर सवाल...

​कौशाम्बी में मानवता शर्मसार: क्या पाल समाज की बेटियों की जान की कीमत इतनी सस्ती है?

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​ब्यूरो रिपोर्ट: [The Shepherd Times] कौशाम्बी, उत्तर प्रदेश ​दिनांक: 06 अप्रैल, 2026 -धीरज कुमार पाल (मीडिया प्रभारी,होल्कर सेना-प्रयागराज मण्डल) (संस्थापक - The Shepherd Times)    ​उत्तर प्रदेश के कौशाम्बी जनपद से एक ऐसी हृदयविदारक और रूह कँपा देने वाली घटना सामने आई है, जिसने न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि हमारे समाज के भीतर पनप रही अमानवीयता और सामंती क्रूरता को भी नंगा कर दिया है। ​थाना चरवा के अंतर्गत आने वाले ग्राम चक सहाबुद्दीन पुर में एक 19 वर्षीय मासूम बेटी, किरण पाल, को जिस बेरहमी से मौत के घाट उतारा गया, वह किसी भी सभ्य समाज के लिए कलंक है। ​घटना का क्रम: वर्चस्व और अहंकार की बलि चढ़ी बेटी ​प्राप्त जानकारी और मृतका की माँ, श्रीमती कमला देवी द्वारा दी गई तहरीर के अनुसार, इस पूरे विवाद की जड़ एक छोटी सी बात थी—एक भैंस का खेत में चले जाना। बताया जा रहा है कि 5 अप्रैल की सुबह प्रार्थिनी की भैंस विपक्षीगणों के गेहूं के खेत में घुस गई थी।  इसी बात को लेकर गांव के ही दबंगों (बब्लू यादव, ओम प्रकाश, विनय, धर्मेंद्र, आर्यन, सुघर और भँवर यादव) ने न केव...