एकजुटता ही न्याय का आधार: व्यक्तिगत विरोध से ऊपर उठकर समाज के लिए जागें
जय माँ अहिल्या!
आज हमारा समाज एक ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहाँ हमारे शब्द और हमारे कार्य आने वाले कल की दिशा तय करेंगे। पाल समाज हमेशा से ही अपनी कर्मठता और न्यायप्रियता के लिए जाना गया है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में हमें अपनी रणनीति और सोच पर गहराई से विचार करने की आवश्यकता है।
विरोध का स्वरूप: विनाशकारी नहीं, सुधारात्मक हो
समाज के भीतर वैचारिक मतभेद होना कोई बुरी बात नहीं है। लोकतंत्र और स्वस्थ समाज में विरोध प्रगति का संकेत है। लेकिन प्रश्न यह है कि हमारे विरोध का तरीका क्या है?
यदि हमारा विरोध किसी व्यक्ति को समाज सेवा से हतोत्साहित करने या उसे विवश करने के लिए है, तो हम अपनी ही शक्ति को कम कर रहे हैं। हमारा तरीका ऐसा होना चाहिए कि सामने वाला आपकी बात की तार्किकता को **स्वीकार** करे और स्वयं में सुधार करने के लिए प्रेरित हो। विरोध का लक्ष्य 'व्यक्ति का पतन' नहीं बल्कि 'व्यवस्था का सुधार' होना चाहिए।
हर व्यक्ति में एक 'अगुवा' छिपा है
अक्सर हम यह सोचकर पीछे हट जाते हैं कि कोई और न्याय की आवाज उठाएगा। हम किसी एक चेहरे या एक नेतृत्व की राह ताकते रहते हैं। पर सवाल यह है कि— आप क्यों नहीं? नेतृत्व केवल पद से नहीं, पहल से आता है। आज समाज को ऐसे युवाओं की जरूरत है जो 10 लोगों को साथ लेकर अन्याय के खिलाफ खड़े हो सकें। याद रखिए, शुरुआत अकेले ही होती है, काफिला तो बाद में खुद-ब-खुद जुड़ता जाता है। जो लोग आज विरोध में अपनी ऊर्जा लगा रहे हैं, उनके पास समाज के अग्रणी चेहरों में शामिल होने का सुनहरा मौका था। नकारात्मकता के बजाय रचनात्मक नेतृत्व पर ध्यान दें।
न्याय की पुकार: 11 अप्रैल को एकजुट हों
वर्तमान में जिस तरह से एक गंभीर मामले में तथ्यों के साथ खिलवाड़ किया गया है, वह न केवल निंदनीय है बल्कि पूरे समाज के लिए चिंता का विषय है।
हत्या को आत्महत्या का रूप देना और आरोपियों को संरक्षण प्रदान करना सीधे तौर पर न्याय प्रणाली को चुनौती देना है। यह स्पष्ट है कि इसके पीछे कौन सी शक्तियां काम कर रही हैं।
यह समय आपसी आरोप-प्रत्यारोप का नहीं, बल्कि कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होने का है। यदि हम आज एक नहीं हुए, तो आने वाले समय में न्याय केवल एक सपना बनकर रह जाएगा।
आह्वान:
आगामी 11 अप्रैल को हम सभी को एकजुट होकर न्याय के लिए अपनी आवाज बुलंद करनी है। देर से ही सही, लेकिन हमारी एकजुटता इतनी प्रभावी होनी चाहिए कि व्यवस्था दोषियों को बचाने के बजाय उन्हें सजा देने पर मजबूर हो जाए।
साथ आएं, क्योंकि एकजुटता ही हमारा सबसे बड़ा हथियार है।
-धीरज कुमार पाल
(मीडिया प्रभारी-होल्कर सेना-प्रयागराज मण्डल)
The Shepherd Times

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