8वें दिन भी दीपक बोराडे का आमरण अनशन जारी मुंबई (महाराष्ट्र) |धनगर आरक्षण की आग: आज़ाद मैदान में।
24 मार्च, 2026
विशेष संवाददाता
मुंबई का ऐतिहासिक आज़ाद मैदान एक बार फिर अपनी मांगों के लिए अड़े योद्धाओं का गवाह बन रहा है। धनगर समाज को अनुसूचित जनजाति (ST) श्रेणी में शामिल करने की मांग को लेकर जुझारू नेता दीपक बोन्हाडे (बोऱ्हाडे) का आमरण अनशन आज 8वें दिन में प्रवेश कर गया है। बिना अन्न ग्रहण किए बोन्हाडे की शारीरिक स्थिति नाजुक होती जा रही है, लेकिन उनका संकल्प हिमालय की तरह अडिग है।
जनसैलाब और बढ़ता आक्रोश
पिछले एक सप्ताह से आज़ाद मैदान में महाराष्ट्र के कोने-कोने—पुणे, सोलापुर, कोल्हापुर और जालना—से आए धनगर समाज के लोगों का तांता लगा हुआ है।
"आरक्षण हमारे हक का, नहीं किसी के बाप का" जैसे नारों से पूरा मैदान गूँज रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार दशकों से केवल आश्वासन दे रही है, जबकि ज़मीनी हकीकत में समाज आज भी विकास की मुख्यधारा से कटा हुआ है।
मुख्य मांगें और संघर्ष का इतिहास
दीपक बोन्हाडे और धनगर समाज की प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
* ST आरक्षण का कार्यान्वयन: धनगर समाज को तत्काल प्रभाव से अनुसूचित जनजाति (ST) का प्रमाण पत्र और आरक्षण का लाभ दिया जाए।
* GR की मांग: समाज के नेताओं का स्पष्ट रुख है कि जब तक सरकार इस संबंध में आधिकारिक शासनादेश (Government Resolution) जारी नहीं करती, आंदोलन पीछे नहीं हटेगा।
* संवैधानिक अधिकार: आंदोलनकारियों का तर्क है कि 'धनगर' और 'धनगढ़' की भाषाई त्रुटि के कारण उन्हें उनके संवैधानिक हक से वंचित रखा गया है।
> "हमने सरकार को 12 साल का लंबा समय दिया है। अब हमारे पास खोने के लिए कुछ नहीं है। जब तक आरक्षण का लिखित आदेश नहीं मिलता, मैं यहाँ से हटने वाला नहीं हूँ, चाहे इसके लिए प्राण ही क्यों न त्यागने पड़ें।" — दीपक बोन्हाडे (अनशन स्थल से)
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सरकार की चुप्पी और भविष्य की रणनीति
आठ दिन बीत जाने के बाद भी सरकार की ओर से कोई ठोस समाधान न निकलना प्रदर्शनकारियों के गुस्से को और भड़का रहा है। समाज के अन्य नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि दीपक बोन्हाडे के स्वास्थ्य को कुछ भी हुआ, तो यह आंदोलन केवल मुंबई तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे महाराष्ट्र में चक्का जाम किया जाएगा।
आंदोलन स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है, लेकिन जनसैलाब को देखते हुए प्रशासन के हाथ-पांव फूल रहे हैं। अब देखना यह होगा कि क्या महाराष्ट्र सरकार इस संवेदनशील मुद्दे पर कोई बीच का रास्ता निकालती है या यह गतिरोध और उग्र रूप धारण करेगा।
सौजन्य: शेफर्ड समाचार


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